अच्छे आदमी थे तो नेताजी क्यो बने

अभी कुछ दिनों पहले हमारे प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह जी कह रहे  थे की उन्हें राजनीति  में आना ही नही था मूलतः तो वे एक शिक्षक थे और जब तक वे पढाने  का कम कर रहे थे वे उनके सबसे अच्छे दिनों में से एक थे, लेकिन मेरा मानना है की जब आप एक शिक्सक  थे और वे दिन आपके अच्छे दिनों में से एक थे तो आप इस गन्दी राजनीति में क्यों आ गए, देश का भला करने की इतनी तीब्र इच्छा थी तो आज आपका ये क्या हल हो गया है की आप भारत के इतिहास के अभी तक के सबसे कमजोर प्रधान मंत्री शाबित हो कर रह गए हैं, राजनीति को मै गन्दी से गन्दी वस्तु मानता हूँ लेकिन देस की विडम्बना यह है की देस का जिम्मा ऐसे ही लोगो पर ही रहता है

जो सिर्फ़ अपने भले की सोचते है जो सांठ गांठ  करना जानते है, जो खरीद बेंच का काम करते हैं, जो की एक तत्वज्ञानी भी है क्योकि न तो इनका कोई दोस्त होता है न कोई दुश्मन, जैसे आतंकवादियों का कोई धर्म नही होता कोई जिम्मेदारी नही होती उनके लिए वे जो भी करे वाही सही होता है कुछ उसी तरह से हमारे नेताओ में भी होता है न तो इनका कोई धर्म होता  न ही कोई कर्तव्य, बस सत्ता में बने रहे सत्ता से हटते भी हैं तो सत्ता में बने रहने के लिए ही

हमारे बहुत सारे नेता विचारे आए थे देस का भला करने के लिए लेकिन गलती से अपना भला करने लगे भूल से अपनी झोली भरने लगे

यह मै उन नेताओ के लिए कह रहा हूँ जो की कुछ पुराने है नए में तो मुझे जरा भी भरोषा नही है की उन्हें देस की भावना क्याहोती है यह पता भी होगा की नही उनके के लिए तो बाप की बपौती ही होगी .

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