कुछ साल पहले मै एक धार्मिक किताब में पढ़ा था की खाना खाने से पहले भगवान का नाम लेकर खाना चाहिए और इस का पालन करने के लिए मैंने बहुत मेहनत भी की थी लेकिन दुःख के साथ कहना पड़ रहा है की मै इस में सफल नही हो पाया था
एक दो बार शायद सफल भी रहा होऊ पर लगातार बना नही पाया और कुछ दिनों के प्रयास के बाद मैंने इसे आख़िर में छोड़ ही दिया
होता क्या था की जब खाना खाने के लिए बैठता तो एक दो निवाले खाने के बाद ही भगवान का नाम याद आता था तब मै क्रोध में आकर जो भी खाना चबाता होता उसे बहार उगल आता और कुल्ला करके फिर से भगवान का नाम लेकर खाना खाता
लेकिन बाद में मैंने विचार किया की यह काम तो स्वतः ही होना चाहिए इसके लिए इतना सब कुछ करने की क्या जरुरत है भगवान की मर्जी समझ कर के मैंने ऐसा करने का विचार छोड़ दिया अब भगवान का नाम शायद ही खाने के समय लेता हूँ
लेकिन इसका मतलब ऐसा जरा भी न समझे की मै भगवान को नही मानता भगवान में मुझे पुरी श्रद्धा है
आप सब भी शायद भगवान का नाम लेकर खाना खाते होंगे






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बालसुब्रमण्यम // April 15, 2009 at 3:06 am |
नहीं मैं भगवान का नाम लेकर नहीं खाना शुरू करता। मुझे लगता है कि हम सबको उन गरीब भारतीयों का स्मरण करते हुए खाना शुरू करना चाहिए जिन्हें भरपेट खाना नहीं मिलता, और वह भी इस अतुल्य भारत में। तब शायद हम ऐका कुछ करने को प्रेरित होंगे ताकि उन्हें भूखा न रहना पड़े।